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Friday, 25 May 2012

two poems based on the themes discussed onS ATYA MEV JAYATE----dowry deaths and female foeticide

बडे अच्छे लोग है  वो 
संस्कारी
रोज सुबह आती है 
उनके घर से भजनो  
की धुन प्यारी 
 हर तीज हर त्योहार 
हर व्रत हर उपवास
करते है लगन से  
निभाते है पूरी तऱ्ह 
हर नेग विधी और विधान 
बेटे की, की है 
अभी अभी शादी 
दुल्हन है बहुत ही प्यारी हजार  गुणोवाली 
फिर आयी उसके पग फेरो की रसम
भाई आकर ले गये  अपनी बहन
तीन दिनो के बाद 
ससुराल वापस आ  गयी  अब 
पर लगा जैसे  वो प्यार 
वो मुहब्बत 
सब हो गये है गायब 
एक दिन आया न्योता 
उसकी सहेली के घर से   
पर ना  कह दिया सास ने 
"मासाहारी होते है जीव हत्यारे   
उनसे  से रखते नही है हम नाते "
कुच्ह दिनो बाद 
पाडोसियो ने सुनी एक चीत्कार
कोई  भडभडा रहा था   जैसे किवाड 
""खोलो ,बचाव, माफ कर दो "
लेकीन घर वालो के कानो पर रेंगी ना जू 
तब कुच्ह पाडोसियो ने 
दरवाजा खुल्वाया 
बहु की अध्जली लाश को  बाहर  निकाल्वाया  
मरणासन अवस्था थी दे ना सकी बयान 
उंगली से  इशारा कर त्याग दिये उसने प्राण  
ससुराल वाले साफ बच गये 
और अन्य लाड्कियो के पिता 
आनें लगे लेकर रिश्ते  
'"माफ किजीये अभी सूतक लगा हुआ है    
कैसे करे हम आपसे बात?'" 
"तेरःवी के बाद 
'भगवान' की कथा करा ले 
फिर इत्मिनान से शादी की बात चला ले 
नयी बहु का स्वागत हम करेंगे दिल खोल कर 
आप भी हमारी इज्जत का रखना खयाल "
Statistics show
the ratio of male 
to female foetuses 
in natural abortions
is fourfold
rarely does a  female foetus
abort itself
that is how God has proposed
But man has beaten God
in his own game
Sience, can detect a female in the womb
and abort it artificially
and says "development" is the name .
OF THE GAME 

2 comments:

  1. Sick is human mind....that's all I can say !! How can a society be so brutal...
    Beautiufl lines, nevertheless...

    ReplyDelete
    Replies
    1. Thankyou so much Panchali:))
      for the comments ----comments do give one a boost ---and yes you have rightly said --""a sick human mind""
      but then they are thriving it seems -.

      thanks once again ---feels great to see you here
      love
      rajni

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