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Wednesday, 31 October 2012

Life's story ---in lantern form



follows a pattern

challenges are met and solved

24 hours of a day

are the turf


sun rises

breathes life

a day is



the burning sun

scathes the land

the earth becomes



cool breeze



serenity embalms 


moon and stars

shining & glistening soothen

the life that was



the day

its 24 hours

   make  life's history

for all.


Monday, 29 October 2012


SHE was a woman of substance,
 She always knew her stance 
  Handled the world correctly
  Never left anything to chance.
 No favours ever granted
 No favours did she ask,
 She made the world notice
 And sit up with a Gasp!!!
Put India on the world map
Brought nations to salute
Had she lived a little more
In our own pot, we wouldn't have stewed !

She knew how to handle
Her prodigal countrymen,
OH! only if she would have lived
We'd have reached ,that golden bend
Where !!
We would not have borrowed
Instead we would have lent
SHE was Indira Gandhi 
The woman of substance 

Wednesday, 24 October 2012


When we talk about corruption  we   talk  about  only  one  aspect  of  corruption  i.e.  financial  corruption  , which ironically is not   a  very     old  phenomenon  ..whereas we ignore;-----That other  kind  of  corruption  which  is  prevailing  in our  system  since  ages  since  centuries  and  has  deeply   penetrated   our  culture  , our  thought  process  , our  minds   our    social  and   personal lives    .   ... I am talking about the  CORRUPTION  OF  OUR VALUE  SYSTEM ..  !.We forget that if  we  can  take  care   of  our  dwindling  moral values  ,  our  deranged   thought  process , our   stinking  social  and  cultural  beliefs  .. the   financial   corruption  will  vanish by itself  .. financial  corruption is  the   direct   result  of  the  decaying  value  system . In fact we just don't consider these  as corruption ,on the contrary we   have  accepted  them  as  a  way  of  life . -

Our  caste  ridden  culture  , the  cruel   discrimination between  male  and  female  children , shunning  of  hard  work  , clinging   to  the age  old   rituals  of  religious fanaticism  blind faith and worship ignoring   the  spirit   behind  them , our  ugly  dowry  system  ,  mindless  expenditure  in marriages   , these are   but a few  of  the  practices   prevailing  in our  society   which  have made  inroads  in  our  system  to  a great    extent  ..we  never  hesitate  in following  them  and  don't  consider  them  as    something  which should  be shunned or  thrown  away  like  a  poisonous  snake.
The actual corruption that India and Indians have to fight is the degeneration of  values .Our degenerating mindset.
We never think that squandering of time,natural resources ,water, energy etc  is a very serious form of corruption.These
 are precious things which have to be saved .
We are not aware of our social responsibilities not aware of the drastic hardships we will be required to face if we do not learn to respect and honour God's gifts to us our "natural resources" The ecological imbalance which has already started to spread its tentacles will ultimately devour us one day.
Why is it that we appreciate and 
never tire of praising 
the cleanliness of foreign lands ,we refrain from spitting on the roads in Singapore and respect its laws BUT as as soon as we land in our own Motherland in our own house complacency and callousness takes over.
This is actual corruption which has to be tackled .Once we have a mature  balanced and healthy mindset all other forms of discrepancies will automatically  weed themselves  out of our land .

So its all a matter of attitudinal change a change in the thinking process a pride in our being, a pride in being called an Indian and making  ourselves worthy of being able to make India proud of us She should be proud that we belong to her and that we are capable of bringing laurels to her"" Our motherland ""the land which has given us our identity.

Tuesday, 23 October 2012

kashti --

 क्यों लोग कश्ती को बनाते है जीवन का प्रतीक ?
शायद इसलिए क्योकि 
संसार रुपी इस अथाह सागर में 
मनुष्य इक अदना सा लाचार प्राणी है .
जो ये समझता है ,
जिसे ये मालूम है 
की वो निरीह, विवश और अज्ञानी है .

उसे इस बात की है पूरी खबर 
जैसे जैसे सागर में उठती है लहरे 
वैसे वैसे  हिचकोले 
खाती  है कश्ती 
कभी शांत 
कभी नटखट 
कभी भीषण और वीभत्स.
उसके जीवन की डोर 
कैसी  विवश .

लेकिन फिर भी 
हर आदमी 
देखता है सपने. 
पूरा करने उन्हें 
 हौसले भी है रखता  .
शायद यही है वो जज्बा 
जिसे  हमें गया है नवाज़ा .
यही है वो  ताकत 
जो हमें
थमा देती है पतवार .
और हम बन जाते है
अपनी कश्ती के खेवनहार .

पर हर पल, 
हर क्षण ,
आशंकाओ से है घिरे रहते .
आदम को दिए 
श्राप के बोझ को  
रहते है सहते .

यही है जीवन के सफ़र के कहानी 
कभी कश्ती डोले ,
कभी  डूब  जाये 
कभी शांत समुंदर में 
झूम के लहराये 

Friday, 19 October 2012

you and I

pic from net

we are together
you and me
and that is the whole
world for me
come rain or hail or sun
your love is my  safest canopy.

to me your love 
is lease of life
to me your love is the prettiest sight
do 'I' need  help when 'YOU' are there?
your arms are the only crutch 
to rely.

oh look at that distant glorious sight
see  that horizon that meets the eye .
where the sky engulfs the earth 
i am the earth and  you the sky 

When we are  together
 you and me
The world then smiles and so do we
Under your caressing looks
i breathed
under your caring eyes i hope to die..

Thursday, 18 October 2012

war and peace----in hindi

एक था राजा "" अशोक ""
उसकी चक्रवर्ती बन ने की चाह थी ऐसी अजीब
इंसान के जीवन को नहीं समझता था वो कोई नायाब चीज

उसकी जिद ने  मचाई थी तबाही ऐसी
कलिंग देश के हर गाव हर शहर
पर छाई थी उदासी शमशानों  के जैसी
 बन क़र शामत बरस पडा था उसका कहर
दौड़ गयी थी  हर ओर  शोक की लहर 
 ऐसा था वो" राजा अशोक "

पर एक दिन शाम को जब वो निकला देखने युद्ध के नतीजे
चारो ओर थे दृश्य करुना के फैले और आसुओ से थे आँचल माओ बहनों के भीजे 
उसने सुना और देखा विवशता की कराहों को
और झेला अपनी ओर फेके गए श्राप और नफरत के    बाणो को

तब पश्चाताप की आग में
उसका अहंकार जल गया
और दयावान वो राजा बड़ा बन गया
किये उसने प्रजा के  सहूलियत के कई इंतजाम  
तब जाके कहलाया वो "अशोक महान "
उसका साम्राज्य तब  वहा तक पहुच गया  
जहा वो अब तक बन क़र योधा न जा सका
ऐसी ही कहानी है
साबरमती के संत की
जिसने बिना खडग बिना ढ़ाल
क़र दिया अपने देश को दुश्मन के चंगुल से आजाद
अकेले खाई  उसने अपने सीने पर गोलियो  को
पर बचा लिए उसने बुझने से लाखो घरो के रोशन दिओ को
अहिंसा से युद्ध जीता और महात्मा बन गया
दुनिया को शांति की राह और अमन सिखा गया
के पन्ने
हमेशा लिखते है एक ही कहानी
खून खराबे  से न जीत सका दिलो को
कोई  राजा कोई रानी
फिर क्यों करता है युद्ध
भाई अपने ही भाई से  
पौधा क्यों है वो बोता
नफरत और तबाही के ?
गाँधी ने अहिंसा से जीता युद्ध परायो से -
-बहने दिया न एक बूँद   लहू  का
किसी भी  देश वासियों के.
पांडव और कौरव तो थे
भाई भाई
पर खून और तबाही की नदिया उन्होंने भरपूर बहाई
अपने ही देश में मिल जाते है हमे
उदहारण इतने सारे
हिटलर और नपोलियन के किस्सों के ले हम क्यों सहारे ?

देखा नतीजो को है हमने यूद्ध के हमेशा
निर्दोशो का है खून बहा
और दुःख ने किसी को नही  है बख्शा .
करले हम आज से
 ऐसा एक प्रण
दुनिया से युद्ध के नामोनिशा
को मिटा क़र ही लेंगे दम

तब  शायद
हम वो पदवी खुद को सकेंगे  दे
दाता ने हमें दी थी
जो ऐसा  कह क़र के
""मनुष्य की मनुष्यता
इंसान की इंसानियत
है मेरी पूजा
मेरी इबादत
मेरी बंदगी
मेरा धेय "

Tuesday, 9 October 2012


अजनबी तुम जो लगते थे पहचाने से
क्या हो गया क्यूऊ लगने लगे हो अनजाने से ?
याद करो उन मुस्कुराहटों आती थी
जो तेरे आ जाने से !!

खिलखिलाहटे तो हम खो ही चुके
मुस्कुराहटें तो हमारी मत छीनो
कही ऐसा न हो
यादो की हिचकिया ले जायेसाँसों के इस खजाने को

याद आती है बीती हुई कुछ बातें
वक़्त ने दी थी कुछ खामोश सी आहटें

कह रहा था वो देकर दस्तक
न आऊंगा अब तेरे दर तक
आंसू आँखों के तेरे मैं बन न पाउँगा
चला जता हूँ मैं अब नहीं मैं आऊंगा

तभी रोका था मैंने "उसको"
थाम कर हाथ कहा था "उनको'
रुकना पड़ेगा तुम्हे सदा के लिए वरना साँसे मेरी रुक जाएँगी
शायद रुक भी जायें सुईयां तुझे क़ैद करने को
पर उड़ जाएँगी मेरी साँसे तलाशने को तुझे

फिर तू पलट के आया भी तो हमें न यहाँ पायेगा
न तू पायेगा हमें न हम ही तुझे पाएंगे

तब वो आंसू मेरी आँखों में तूने जो रोकना चाहा
तरसेगा तू वही आंसू बन के आने को

रुक जा अभी न छोड़ साथ को
खुदा भी तो यही कहता है
"चला जाता है वक़्त फिर न लौट सकने को

 AJNABI ,tum jo lagte thhe pahchaane se
 Kya ho gaya kyuoo ho gaye anjaane se?

Yaad karo un muskurahto ko
Aati thhi jo tere aa jaane se.

Khilkhilahto ko toh hum kho hi chuke
Muskurahte toh hamari mat chheeno;

Kahi aisa na ho yado ki hichkiya,le jaaye saanso ke is khajane                                                                                            ko.

Yaad aati hai beeti hui kuchh baaten
"waqt ne di thhee kuchh                                                               
khamosh si aahtnei

Kah rahaa thha woh de kar dastak ,
na aaungaa ab tere dar tak.
Aansoo aankho ke tere mai ban na paoonga,
Chalaa jata hun mai ab nahi mai aaunga.

Tabhi roka thha humne usko;
Thhaam ke haath kahaa thhaa "unko",

Rukna padega tumhe sadaa ke liye;
Warna saanse meri ruk jaayengi.
Shayad ruk bhi jaayne suiynaa tujhe qaid karne ko!
Par ud jaayengi meri saanse talashne ko tujhe

Phir tu palat ke ayaa bhi
par hame na yahnaa payega.

Na tu payega hame
na hum hi tujhe payenge ,
Tab ,woh aansoo
 meri aankho mne toone jo rokna chahaa

Tarsega tu wahi aansoo ban ke aane ko
Ruk jaa abhi ; na chhod saath ko
"Khuda" bhi toh yahi kahtaa hai
Chalaa jataa hai waqt Phir na laut 'sakne' ko.

pyar ki kahani

all pictures from the net

रेगिस्तान में घर था                   
पत्थरों की थी    ज़मीन
काटों  का जिस्म था
पर नाज़ुक था दिल

मुसाफिर एक गुज़रा
बन के हवा का झोंका
मुहब्बत की  दस्तक पर
काटों का जिस्म सिहरा

इश्क और मुश्क
छुपाये नहीं हैं छुपते
काटों में फूल बन कर
खिल उठते हैं रिश्ते

आशिक की दस्तक ने   
जज्बातों को झकझोरा
काटों में खिला फूल  
आशिक को ढूँढने   निकला  

जब बीत गए दिन कुछ 
नज़रों ने सुकून पाया 
खुदा को अपने देख 
फूल झूम के लहराया

पावों में बांध घुंघरू
थिरकने लगी वो हरदम
ऐसा लगा की जैसे
साँसों ने जान पाई
दिन बीतने लगे
हीरे के बन के जैसे
रातें भी बन के चांदी
लेने लगी अंगड़ाई

साथ लगा बढने
वक़्त थम गया था 
खुशियों  से भरा जीवन 
इक संग गुज़र गया था 

अब वो खड़ी अकेले 
याद कर रही है
गुज़रे हुए दिनों को 
और मुस्कुरा रही है 
खुशिया है अभी बाकी 
है साथ दोनों अब भी 
प्यार तब बहुत था 
है उतना ही प्यार अब भी  

Monday, 8 October 2012

Radheshyam Jeweller---the MBA

"Radhesyam jewellers""----had its shutters put down a wee bit early everyday in this festive season ---reason its owner Shri Radhesyam Parikh did not want to go home through the deserted roads late at night with all his days earnings . He was an MBA from a foreign university.

His was a reputed shop and had a selective clientele who would wait for the next day for his shops to open but would not go to another --such was his goodwill and reliability -----so a few minutes early closing did not hurt his business.

He was smiling to himself so happy that inspite of the recession and the rising prices of the yellow metal his business was booming --thanks to the Indian psyche of investing in gold.

He avoided late nights and preferred to reach home early because of the rising cases of robbery and car-holdups.He always chose Gandhi road which was always busy and had a police station of its own and whose inspector in charge was known to him ---so he was safe " its good to have acquaintances in high places , specially in the police for then you are sure to get good service" he mused .-------When suddenly his reflexes made him bring the car to a screeching halt---a motorcycle had come and dashed against his speeeding car and the pillion rider had fallen , rather crashed onto his bonnet whereas the front wheels of the bike had lodged under the right front wheel of his car-- he was unnerved -OH God !!! before he could think a crowd had gathered and the constables ,inspectors all had rushed out of the police station.

Thankfully neither of the two were hurt----the pillion rider had a few nasty bruises but that was all .The rider had jumped off the bike and nothing untoward had happened. The bikers were sensible enough to understand that it was no ones fault and just an accident it was written in their FATE for that day ---a help of a thousand rupees from the rich seth would pay for both the repair of the vehicle and of the man.

Everything was settled amicably and the crowd dispersed ---the injured men and the police inspector and his constables all walked off with their share from Shri Parekh and a sigh of relief breathed itself out from his lips ---But half way it turned into a shriek as Radheshyam ji saw that his bag of the days earnings had vanished.
He ran to the poice station and reported the case--- an FIR was lodged and a search pary was sent to look for the robbers ----it could be anyone from among that crowd of at least 50 people .


"Phew !!! that was narrow !!!"

said Ramu when all the six of them sat down to share their loot .

"Narrow!!! that was a Solid move to be able to smuggle off all that booty right from under the nose of the policemen and such a big crowd."

"How on earth did you plan it that way ?---!!!!!" this was sukhbir

"HAHAHA!!! because I knew that everyones attention would be towards the two of you and no one will see me take out that bag from the car and ride away with Raju waiting on the bike ."

"Hahah and it was good that you thought of shifting all the loot to Sam and Salim waiting at the corner."


"Thanks, that was a risk allright a very big one but I believe that ---- ...........

----{and he stood up abruptly cutting short his dialogue}


"Salaam Boss!!! was it ok ???"

"Yes very well done ---now the insurance people will have to cough up a huge amount , all that moolah was heavily insured.All of you are in my payroll from today ---smart work done by you ." said Radheshyam

Thankyou saab ---WHAT AN IDEA SIRJI ---

Friday, 5 October 2012

murder solved

This is the story
of Old McCartney
a partner of McCartney
& McCartney  the firm.
He was the senior attorney
and a famous attorney
of  McCartney & McCartney the firm.

As he reached the gates
of his royal estate
he saw the gate-keeper
skimper away.
Now that was unusual
so the furious septuagenarian
brought himself to open the gate.

But he was unaware,
this was a plot and a snare,
where he was the unsuspectng bait.
A bullet was shot
which went through  his heart
and he slumped on the ground
clear dead.

***  ****  ****

the Detective then came
with  reporters in pursuit
the news like wild fire
was spread.

****     ***** ****

The suspects were summoned,
five females ,and a son.
Not  a criminal so  hardened
the son begged for  pardon.
Calling his step mother on the scene
He then spilled around all the beans.

They had hatched a plot with thoughts  of greed
 and the gate keeper ,to shoot the master agreed
It was a plotting in haste----no one was chaste
So all the three--- in the police dragnet
were now cooling their heels.

*****      *****     *****

The inspector
and sleuth
were friends in their youth
they shared the applause and accolade.
The media anounced
they were better than hounds
and no crimminal would
they let escape .

Tuesday, 2 October 2012

bas tum sirf tum

picture from the net

आज जब पूछा किसी ने
कौन है तुम्हारा प्रेरणा स्रोत ?
तो  सोचने पर विवश हो गयी

सच तो है
कौन है मेरा प्रेरणा स्रोत ?
कौन है जिसके सानिध्य में
मिलती है मुझे उर्जा !!
मिलती है मेरे जीवन को गति ?
कौन है जिसके आने से
अति है मेरे जीवन में ख़ुशी ?

कौन है ?

कौन है जिसकी आँखों में झांकती हूँ
मै  चाहतें ले कर
कौन है ?
जीती हूँ जिसकी मुस्कुराहटो  के लिए ?

विचारो में खो कर बंद  जो की मैंने पलके
कुछ पल के लिए नज़र आया बस
चेहरा हर बार  तेरा प्रीतम मेरे

यद् आयी वर्षो पुराणी वो घडिया
मतलबी अपनों और परायों की भीढ़ में खड़ी
मई अकेली सी थी
और असहाए सी  भी
जीवन के उन कठिन क्षणों में
सब से परे दो आँखें संवेदना से भरी
जैसे कह रही थी
आगे बढ़ो छू लो मुझे
मै  तुम्हारा हूँ
और तुम मेरी

उस एक पल की हकीकत है ये
जिन्दा हूँ आज  बस तेरे दम से
मेरे जीवन की हर ख़ुशी आर गम
बाटा है मैंने तुझसे मेरे हमदम
बस चा हा  है
सराहा है
पूजा है तुम्हे
प्रभु वंदना की है
तब पाया है तुम्हे

तुम्ही हो मेरे सरताज
तुम्ही हो साथी मेरे
तुम्ही मेरे प्रेरणा स्त्रोत
तुम्ही हो मेरे सखा

aaj jab poochha kisi ne
"kaun hai tumhara
prerna strote?"
tau sochne par vivash ho gayee.

sach to hai
kaun hai mera prerna strote!!
kaaun hai jiske sanidhya mey
milti hai mujhe  oorja !!
milti hai mere jeevan ko gati ??
kaun hai jisske
aane se
aati hai mere jeevan me khushi?

kaun hai ?
jiski aankho mein jhakti hoon
mai chaahatein  lekar  
kaun hai ?
jeeti hoon jisiki muskurahato  ke liye?"

vicharo me khokar
band jo ki maine palkein,
 kuchh pal ke liye
nazar aya bas
chehra har baar tera
preetam merey.

yad aayee varsho purani wo ghadiya
matlabi apno aur parayo ki bheed me khadi
mai akeli si thi aur asahay  si bhi
jeevan ke un kathin kshano mey
sab se parey
do aankhe samvedna se bhari
jaise kah rahi thi
aage badho
chhoo lo mujhe
mai tumhara hoon
aur tum meri

us ek pal ki
 haqeeqat hai ye
jinda hoon aaj bas terey dum se
merey jeevan ki har khushi har gam
baataa  hai maine tumse merey humdum

bas chaha hai
saraha hai
pooja hai tumhe
"Prabhu Vandana ki hai "
Tab paya hai tumhe
tumhi ho merey sartaj
tumhi ho sathi merey
tumhi merey prerna strote
ho merey sakhaa.

Monday, 1 October 2012

photographs from my collection-----on the Mahatma's Birthday

                                                     AT MADAME TUSSAUD'S



                                                               AGAIN FROM THE 
                                                            AGHA KHAN PALACE 



                                                                                   AGHA KHAN PALACE PUNE              






                                              AND THIS ONE IS FROM THE NET
                                                  Gandhi ji with Charlie Chaplin
                                                        a rare photograph


Today we also celebrate the Birthday of our late Prime Minister Lal Bahadur Shastri